May 5, 2026

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तमिलनाडु में थलापति विजय ने ऐसा क्‍या कमाल किया, जो रजनीकांत और कमल हासन नहीं कर पाए?

जब कोई फिल्‍म स्‍टार राजनीति में कदम रखता है, तो सीरियर नहीं लिया जाता है. समझदार वोटर जानते हैं कि राजनीति उनकी फील्‍ड नहीं है. फिल्‍म स्‍टार जनता की समस्‍याओं पर उतना तवज्‍जो नहीं दे पाएंगे, जितने ‘फुल टाइम पॉलिटिशियन’ दे सकते हैं. थलापति विजय भी वोटर्स की इस सोच से अनजान नहीं थे.

साउथ सिनेमा के सुपरस्टार थलापति विजय ने राजनीति के मैदान में भी धमाल मचा दिया है. विजय की पार्टी टीवीके ने सोमवार को तमिलनाडु के चुनावी इतिहास में एक तरह का रिकॉर्ड बनाते हुए सत्तारूढ़ द्रमुक और उसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को उनके कोलाथुर निर्वाचन क्षेत्र में करारी शिकस्त दी और सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. 1967 में राज्य में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार के सत्ता में आने के बाद से यह पहली बार है, जब दो द्रविड़ दलों के अलावा कोई अन्य पार्टी चुनाव में विजयी हुई. ऐसे में सवाल उठता है कि विजय ने ऐसा क्‍या किया कि इन्‍हें पहले ही चुनाव में इतनी बड़ी जीत मिली? इससे पहले साउथ के सुपरस्‍टार रजनीकांत और कमल हासन ने भी कोशिश की, लेकिन राजनीति के क्षेत्र में वो कमाल नहीं दिखा पाए जो थलापति विजय ने कर दिखाया है
साउथ सिनेमा के सुपरस्टार थलापति विजय ने राजनीति के मैदान में भी धमाल मचा दिया है. विजय की पार्टी टीवीके ने सोमवार को तमिलनाडु के चुनावी इतिहास में एक तरह का रिकॉर्ड बनाते हुए सत्तारूढ़ द्रमुक और उसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को उनके कोलाथुर निर्वाचन क्षेत्र में करारी शिकस्त दी और सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. 1967 में राज्य में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार के सत्ता में आने के बाद से यह पहली बार है, जब दो द्रविड़ दलों के अलावा कोई अन्य पार्टी चुनाव में विजयी हुई. ऐसे में सवाल उठता है कि विजय ने ऐसा क्‍या किया कि इन्‍हें पहले ही चुनाव में इतनी बड़ी जीत मिली? इससे पहले साउथ के सुपरस्‍टार रजनीकांत और कमल हासन ने भी कोशिश की, लेकिन राजनीति के क्षेत्र में वो कमाल नहीं दिखा पाए जो थलापति विजय ने कर दिखाया है.

रजनीकांत और कमल हासन के फैंस विजय से कहीं ज्‍यादा थे

जब थलापति विजय ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में उतरने का ऐलान किया, तो कई लोगों ने इसे राज्य में फिल्म सितारों द्वारा अपने फैंस के दम पर राजनीति में पैठ बनाने की कोशिश के रूप में देखा. तमिलनाडु में फिल्म सितारों को नेता चुने जाने का इतिहास रहा है. एमजीआर और जयललिता जैसे दिग्गजों ने मुख्यमंत्री के रूप में अपनी धाक जमाई. हालांकि, रजनीकांत और कमल हासन जैसे फिल्‍म सितारे अपने फैंस का प्‍यार राजनीतिक आधार में बदलने में असफल रहे. जयललिता ने भी अपनी एक अलग पहचान बनाई थी, लेकिन उनकी पहले से ही एक पार्टी (एआईएडीएमके) थी. फिर विजय ने कमल हासन और रजनीकांत जैसे सुपरस्टारों से अलग क्या किया, जिनके फैंस उनसे कहीं अधिक हैं? विजय के राजनीति में इस ब्लॉकबस्टर परफॉर्मेंस के पीछे कई कारण हैं, जो इसे एक असाधारण उपलब्धि बनाते हैं.

विजय का ‘क्‍लीयर मैसेज’ बना जीत की वजह
आमतौर पर जब कोई फिल्‍म स्‍टार राजनीति में कदम रखता है, तो सीरियर नहीं लिया जाता है. समझदार वोटर जानते हैं कि राजनीति उनकी फील्‍ड नहीं है. फिल्‍म स्‍टार जनता की समस्‍याओं पर उतना तवज्‍जो नहीं दे पाएंगे, जितने ‘फुल टाइम पॉलिटिशियन’ दे सकते हैं. थलापति विजय भी वोटर्स की इस सोच से अनजान नहीं थे. इसलिए राजनीति में एंट्री लेने से पहले उन्‍होंने क्‍लीयर मैसेज दिया कि वह अभिनय से संन्‍यास लेकर पूरी तरह से राजनीति में सक्रिय हो रहे हैं. 27 फिल्‍में और 30 साल का करियर दांव पर लगाने का फैसला बहुत बड़ा था. इससे जनता में ये मैसेज गया कि विजय राजनीति में टाइम पास के लिए नहीं आ रहे हैं. ऐसे में तमिलनाडु की जनता को विजय में एक ‘थलापति’ नजर आया है.

रजनीकांत से कहां हुई चूक
रजनीकांत ने जब राजनीति एंट्री ली, तो स्पष्टता गायब थी. उन्‍होंने नहीं बताया कि वे फिल्‍म और राजनीति में से किसको ज्‍यादा तवज्‍जो देंगे? एक दशक तक राजनीति में आने की अटकलें लगाने के बाद रजनीकांत ने राजनीति में कदम रखा और चुनाव लड़े बिना ही गायब हो गए. महत्वपूर्ण बात यह है कि रजनीकांत, जिनकी सिगरेट झटकने की अदाएं या धूप के चश्मे के साथ किए जाने वाले करतब दर्शकों को मोहित कर लेते थे, मतदाताओं को यह विश्वास दिलाने में विफल रहे कि वे लंबे समय तक राजनीति में मजबूती से टिक रहेंगे. ऐसे में वोटर्स ने भी रजनीकांत को गंभीरता से नहीं लिया.