देश के कई बड़े शहरों में कमर्शियल गैस की सप्लाई पर दबाव जरूर है, लेकिन घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बड़े संकट जैसी स्थिति अभी नहीं बनी है. सरकार और तेल कंपनियां स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और सप्लाई सामान्य करने के लिए कदम उठा रही हैं.
नई दिल्ली:
पिछले कुछ दिनों से देशभर में एलपीजी (LPG) गैस सिलेंडर को लेकर चर्चा तेज है. कुछ जगहों पर सप्लाई को लेकर खबरें आईं, होटल-रेस्टोरेंट संगठनों ने भी चिंता जताई, जिससे लोगों के मन में सवाल उठने लगे- क्या देश में गैस की कमी होने वाली है?
तो इस पर सरकार और तेल कंपनियों का कहना है कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल कोई संकट नहीं है. लेकिन वैश्विक हालात और सप्लाई चेन की वजह से कुछ अस्थायी बदलाव जरूर किए गए हैं. आइए आसान भाषा में समझते हैं पूरी स्थिति…
1. चिंता क्यों बढ़ी?
हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव- खासतौर पर ईरान-इजरायल और अमेरिका के टकराव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है. इससे समुद्री रास्तों और सप्लाई पर दबाव बना है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर यहां भी चर्चा का विषय बन गया. रिपोर्टों के मुताबिक भारत अपनी कुल LPG जरूरत का करीब 60% से ज्यादा हिस्सा आयात करता है.
इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री रास्तों पर तनाव से सप्लाई को लेकर आशंकाएं बढ़ीं. यही वजह है कि बाजार में चिंता का माहौल बना.

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